India
INFINIA Bharat News
LIVE
BREAKING

मेटा ने बाल यौन शोषण सामग्री की रिपोर्ट सीधे भारतीय पुलिस को करने का वादा किया

मेटा ने बाल यौन शोषण सामग्री की रिपोर्टिंग प्रक्रिया बदलकर सीधे भारतीय अधिकारियों को भेजने का वादा किया, यह कदम नियामक दबाव को दर्शाता है।

Shubhi Mishra3 min read
मेटा ने बाल यौन शोषण सामग्री की रिपोर्ट सीधे भारतीय पुलिस को करने का वादा किया
Shubhi Mishra
Shubhi Mishra

Shubhimishraqq180@gmail.com

View Author Profile →

खबर सुनें

खबर सुनने के लिए चलाएं

0:003:15

खबर सुनने के लिए चलाएं

Meta ने अब बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) की पहचान होने पर उसे सीधे भारतीय कानून‑प्रवर्तन एजेंसियों को रिपोर्ट करने का निर्णय लिया है, जिससे पहले के स्व‑नियामक तंत्र को बायपास किया जाएगा। यह बदलाव 15 सितंबर 2026 को कई विश्वसनीय स्रोतों, जिनमें BBC, Anadolu Ajansı और bdnews24.com शामिल हैं, द्वारा प्रकाशित रिपोर्टों में बताया गया।

पृष्ठभूमि और कानूनी ढांचा

भारत में बाल यौन शोषण सामग्री के खिलाफ कड़ी कानूनी व्यवस्था मौजूद है। सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008 में ऐसी सामग्री का निर्माण, वितरण और स्वामित्व आपराधिक माना गया है। इसके अतिरिक्त, बाल संरक्षण (POCSO) अधिनियम, 2012, नाबालिगों के खिलाफ यौन अपराधों पर सख्त दंड निर्धारित करता है। इन कानूनों के तहत डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म को 24 घंटे के भीतर CSAM को हटाना और संबंधित रिपोर्ट करना अनिवार्य है, जैसा कि भारतीय आईटी नियम, 2021 में भी कहा गया है।

Meta के प्लेटफ़ॉर्म—Facebook, Instagram और WhatsApp—पहले भी भारत में CSAM की उपस्थिति और समय पर रिपोर्टिंग न करने के आरोपों का सामना कर चुके हैं। सितंबर 2026 की शुरुआत में BBC ने बताया था कि Meta ने भारत में ऐसे विज्ञापनों को चलाते रहने की रिपोर्ट की थी, जो बाल यौन शोषण सामग्री को बढ़ावा देते थे। यह संकेत देता है कि प्लेटफ़ॉर्म पर सामग्री मॉडरेशन में अभी भी चुनौतियाँ मौजूद हैं।

Meta की नई रिपोर्टिंग नीति

15 सितंबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, Meta ने अब अपनी आंतरिक रिपोर्टिंग प्रक्रिया को समाप्त कर, पहचानी गई CSAM को सीधे भारतीय पुलिस या अन्य संबंधित एजेंसियों को भेजने का वचन दिया है। यह निर्णय BBC, Anadolu Ajansı और bdnews24.com की समान रिपोर्टों में पुष्टि किया गया है। रिपोर्टों में यह उल्लेख नहीं किया गया कि Meta ने इस कदम के लिए कोई आधिकारिक बयान जारी किया है, लेकिन यह बदलाव नियामक दबाव और सामाजिक सुरक्षा के बढ़ते माँगों को दर्शाता है।

नई प्रक्रिया के तहत Meta को एक सुरक्षित चैनल स्थापित करना होगा, जिससे CSAM की रिपोर्टें एन्क्रिप्टेड रूप में भारतीय अधिकारियों को पहुँचें। इस चैनल की तकनीकी विशिष्टताएँ अभी स्पष्ट नहीं हुई हैं, परंतु यह अपेक्षित है कि भारतीय सरकार रिपोर्टों के फ़ॉर्मेट, आवृत्ति और सत्यापन मानकों पर दिशा‑निर्देश जारी करेगी।

महत्व और आगे की संभावनाएँ

सीधे रिपोर्टिंग से कई लाभ अपेक्षित हैं। प्रथम, यह जांच एजेंसियों को सामग्री की पहचान होने पर तुरंत कार्रवाई करने की सुविधा देगा, जिससे पीड़ितों की सुरक्षा में सुधार होगा। द्वितीय, यह कदम वैश्विक टेक कंपनियों पर भारत में नियामक अनुपालन के दबाव को बढ़ाएगा, और अन्य देशों में समान सहयोग मॉडल को प्रेरित कर सकता है।

भविष्य में, सिविल सोसाइटी समूह इस नई व्यवस्था की निगरानी करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि Meta की रिपोर्टिंग वास्तविक और समय पर हो। साथ ही, भारतीय अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे रिपोर्टों की प्रक्रिया को स्पष्ट करने के लिए विस्तृत गाइडलाइन जारी करेंगे, जिससे प्लेटफ़ॉर्म और कानून प्रवर्तन के बीच सहयोग सुगम हो सके।

Comments

Join the conversation

Sign in with Google to comment on this article.

Related News