जयपुर/बीकानेर: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ (Yudh Abhyas 2026) में गुरुवार को एक महत्वपूर्ण क्षण देखने को मिला। भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में चल रहे सैन्य अभ्यास का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने भारतीय और अमेरिकी सैनिकों को एक साथ प्रशिक्षण लेते हुए देखा और दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी की मजबूती को रेखांकित किया।
सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अभ्यास से जुड़ी तस्वीरें साझा करते हुए भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के साथ मिलकर प्रशिक्षण लेने की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की सेनाओं का साथ में प्रशिक्षण विश्वास, तैयारियों, इंटरऑपरेबिलिटी और साझा उद्देश्य को दर्शाता है।
भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी का अहम प्रदर्शन
अमेरिकी राजदूत ने भारतीय और अमेरिकी सेनाओं के संयुक्त प्रयासों पर गर्व जताया। उनके अनुसार, दोनों देशों की सेनाओं का इस तरह साथ काम करना आपसी रक्षा सहयोग और सैन्य समन्वय की क्षमता को प्रदर्शित करता है।
Yudh Abhyas 2026 भारत और अमेरिका के बीच होने वाले प्रमुख द्विपक्षीय सैन्य अभ्यासों में शामिल है। इसका उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त अभियानों की क्षमता, सामरिक समन्वय और आपसी समझ को और मजबूत करना है।
600-600 सैनिक ले रहे हैं हिस्सा
युद्ध अभ्यास 2026 के 22वें संस्करण में भारतीय सेना और अमेरिकी सेना के करीब 600-600 सैन्यकर्मी हिस्सा ले रहे हैं। इस वर्ष अभ्यास एक साथ दो अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में आयोजित किया जा रहा है।
अभ्यास के प्रमुख हिस्से उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन में आयोजित किए जा रहे हैं। इससे सैनिकों को पर्वतीय और रेगिस्तानी, दोनों तरह के चुनौतीपूर्ण इलाकों में संयुक्त सैन्य अभियानों का अभ्यास करने का अवसर मिल रहा है।
पर्वतीय और रेगिस्तानी इलाकों में संयुक्त ड्रिल
अभ्यास के दौरान भारतीय और अमेरिकी सैनिक समन्वित सैन्य ड्रिल, सिंक्रोनाइज्ड बैटल प्रोसीजर और कंबाइंड-आर्म्स ऑपरेशन पर प्रशिक्षण ले रहे हैं।
अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में अभ्यास का उद्देश्य दोनों सेनाओं को विभिन्न ऑपरेशनल परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ बेहतर तालमेल के लिए तैयार करना है। इसमें संयुक्त योजना बनाने और वास्तविक ऑपरेशनल परिस्थितियों में तेजी से समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम पर भी फोकस
Yudh Abhyas 2026 में पारंपरिक सैन्य प्रशिक्षण के साथ आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को भी प्रमुखता दी जा रही है। अभ्यास में ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम और आधुनिक हथियार प्लेटफॉर्म से जुड़ी क्षमताओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है।
इसके अलावा दोनों देशों के सैन्यकर्मी मल्टी-डोमेन वॉरफेयर से जुड़े अनुभव और प्रक्रियाओं पर भी विचारों का आदान-प्रदान कर रहे हैं। आधुनिक युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए तकनीकी एकीकरण और विभिन्न सैन्य डोमेन के बीच बेहतर समन्वय इस अभ्यास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
क्या है Yudh Abhyas 2026 का उद्देश्य?
भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी और ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन को बढ़ाना है। इसके तहत सैनिक संयुक्त रूप से योजना बनाने, ऑपरेशन को अंजाम देने और अलग-अलग परिस्थितियों में एक-दूसरे के साथ तालमेल स्थापित करने का अभ्यास करते हैं।
अभ्यास के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल हैं:
- भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाना
- संयुक्त सैन्य योजना और ऑपरेशनल कोऑर्डिनेशन को मजबूत करना
- पर्वतीय और रेगिस्तानी क्षेत्रों में संयुक्त अभियान का प्रशिक्षण
- आधुनिक तकनीक और सैन्य प्रणालियों के इस्तेमाल का अनुभव साझा करना
- ड्रोन और ऑटोनॉमस सिस्टम जैसी क्षमताओं का एकीकरण
- मल्टी-डोमेन वॉरफेयर से जुड़ी प्रक्रियाओं पर सहयोग बढ़ाना
28 सितंबर को समाप्त होगा अभ्यास
Exercise Yudh Abhyas 2026 का आयोजन 28 सितंबर तक निर्धारित है। अभ्यास के दौरान भारतीय और अमेरिकी सैनिक संयुक्त प्रशिक्षण के जरिए अपनी ऑपरेशनल क्षमताओं को बेहतर बनाने के साथ-साथ दोनों सेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे सैन्य सहयोग को भी आगे बढ़ा रहे हैं।
राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर की मौजूदगी ने इस अभ्यास के दौरान भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों और सैन्य सहयोग के महत्व को भी सामने रखा है।
Yudh Abhyas 2026: मुख्य बातें
अभ्यास: Yudh Abhyas 2026
संस्करण: 22वां
भाग लेने वाले देश: भारत और अमेरिका
सैनिक: करीब 600-600
प्रमुख स्थान: औली, उत्तराखंड और महाजन, राजस्थान
फोकस: संयुक्त सैन्य प्रशिक्षण, इंटरऑपरेबिलिटी, ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम और मल्टी-डोमेन वॉरफेयर
समापन: 28 सितंबर 2026



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