नई दिल्ली: भारत और स्विट्जरलैंड ने अपनी द्विपक्षीय रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की मौजूदगी में दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े पांच महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
इन समझौतों में प्रवासन और मोबिलिटी, युवाओं के आदान-प्रदान, परिवहन एवं बुनियादी ढांचे, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा नवाचार और तकनीक हस्तांतरण जैसे क्षेत्र शामिल हैं। दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, रक्षा, परमाणु ऊर्जा और आधुनिक तकनीक के क्षेत्रों में सहयोग को भी आगे बढ़ाने पर चर्चा की।
भारत-स्विट्जरलैंड के बीच किन 5 क्षेत्रों में हुए समझौते?
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हुए समझौतों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लोगों, प्रतिभा, तकनीक और संस्थानों के बीच सहयोग को बढ़ाना है।
1. माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप
दोनों देशों ने Migration and Mobility Partnership से संबंधित समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके जरिए लोगों की वैध आवाजाही को सुविधाजनक बनाने और प्रवासन से जुड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
2. युवाओं के लिए Young Professionals Programme
युवा पेशेवरों के लिए Young Professionals Exchange Programme शुरू करने पर भी सहमति बनी है। इसके तहत दोनों देशों के युवा दूसरे देश में सीमित अवधि के लिए काम करने और पेशेवर अनुभव हासिल करने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे।
शुरुआती व्यवस्था के तहत प्रत्येक देश से हर साल 300 युवाओं को इसमें शामिल किया जा सकता है। भविष्य में इस संख्या को 500 तक बढ़ाने की संभावना भी रखी गई है।
यह कार्यक्रम युवाओं को अंतरराष्ट्रीय कार्य संस्कृति, भाषा और पेशेवर वातावरण का प्रत्यक्ष अनुभव देने के साथ दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंध मजबूत करने में मदद कर सकता है।
3. परिवहन, मोबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग
भारत और स्विट्जरलैंड ने Transportation, Mobility and Infrastructure के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए भी समझौता किया है।
इसके तहत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, रोपवे, सुरंगों और टिकाऊ बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में तकनीकी और संस्थागत सहयोग की संभावनाएं बढ़ेंगी। भारत के तेजी से विकसित हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर और स्विट्जरलैंड की तकनीकी विशेषज्ञता के बीच सहयोग इस क्षेत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।
4. वैज्ञानिक अनुसंधान में सहयोग
दोनों देशों ने वैज्ञानिक अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है।
इससे भारतीय और स्विस वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों तथा संबंधित संगठनों के बीच संयुक्त शोध परियोजनाओं और ज्ञान के आदान-प्रदान के अवसर बढ़ सकते हैं।
5. इनोवेशन, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्टार्टअप सहयोग
पांचवां महत्वपूर्ण समझौता Innovation, Technology Transfer and Entrepreneurship से संबंधित है।
इसका फोकस स्टार्टअप, नई तकनीक, तकनीक हस्तांतरण, अकादमिक संस्थानों और उद्योग के बीच सहयोग तथा उद्यमिता को बढ़ावा देने पर है। इससे दोनों देशों के innovation ecosystem के बीच संपर्क मजबूत करने की दिशा में मदद मिल सकती है।
व्यापार और निवेश पर भी रहा जोर
भारत और स्विट्जरलैंड के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं। दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश भी साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
भारत और EFTA (European Free Trade Association) के बीच Trade and Economic Partnership Agreement यानी TEPA 1 अक्टूबर 2025 से लागू हो चुका है। EFTA में स्विट्जरलैंड के साथ नॉर्वे, आइसलैंड और लिकटेंस्टीन शामिल हैं।
TEPA के तहत EFTA देशों की ओर से भारत में अगले 15 वर्षों में 100 अरब डॉलर के निवेश और लगभग 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार सृजित करने की प्रतिबद्धता का प्रावधान है।
ऐसे में भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों में निवेश, तकनीक और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों का महत्व और बढ़ गया है।
रक्षा और परमाणु ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग
बैठक के दौरान भारत और स्विट्जरलैंड ने रणनीतिक सहयोग के अन्य क्षेत्रों पर भी विचार-विमर्श किया। इनमें रक्षा, परमाणु ऊर्जा, व्यापार, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत तकनीक प्रमुख हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों देशों के संबंधों में innovation, infrastructure और advanced technology की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
भारत के लिए स्विट्जरलैंड यूरोप में एक महत्वपूर्ण आर्थिक और तकनीकी साझेदार है, जबकि स्विट्जरलैंड के लिए भारत एक बड़ा बाजार और तेजी से विकसित होती अर्थव्यवस्था है। ऐसे में दोनों देशों के बीच सहयोग का दायरा आने वाले समय में और बढ़ने की संभावना है।
भारत-स्विट्जरलैंड संबंधों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये समझौते?
इन पांच समझौतों को केवल अलग-अलग क्षेत्रों में सहयोग के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इनमें युवा प्रतिभा, वैज्ञानिक अनुसंधान, तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और लोगों की आवाजाही जैसे ऐसे क्षेत्र शामिल हैं जो लंबे समय में द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
खास तौर पर युवा पेशेवरों के आदान-प्रदान और रिसर्च सहयोग से दोनों देशों के बीच संस्थागत तथा people-to-people connectivity बढ़ सकती है। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर से आर्थिक और तकनीकी सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
भारत-स्विट्जरलैंड साझेदारी: प्रमुख बिंदु
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति गाइ परमेलिन की मौजूदगी में 5 समझौतों पर हस्ताक्षर
- Migration and Mobility Partnership
- Young Professionals Exchange Programme
- Transportation, Mobility and Infrastructure cooperation
- Scientific Research cooperation
- Innovation, Technology Transfer and Entrepreneurship
- व्यापार और निवेश सहयोग को बढ़ाने पर जोर
- रक्षा और परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग पर चर्चा
- India-EFTA TEPA के जरिए निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में सहयोग
भारत और स्विट्जरलैंड के बीच हुए ये समझौते दोनों देशों के संबंधों को लोगों से लेकर तकनीक और व्यापार तक कई स्तरों पर आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।की आदान-प्रदान।








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