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जंतर मंतर मामले में सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी, कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने रिहाई का आदेश दिया

जंतर मंतर पर एंटी-सीईसी रैली के दौरान सीजेपी के तीन नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया, अदालत ने रिहाई का आदेश दिया।

Shubhi Mishra3 min read
जंतर मंतर मामले में सीजेपी नेताओं की गिरफ्तारी, कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने रिहाई का आदेश दिया
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दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में सेंटर फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के तीन नेताओं—सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे—को एहतियातन हिरासत में लिया है। सीजेपी की कानूनी प्रमुख रत्ना सिंह ने बुधवार को सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने इन नेताओं को गिरफ्तार किया है। हालांकि, एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने बाद में तीनों को रिहा करने का आदेश जारी कर दिया।

गिरफ्तारी और आरोप

पुलिस सूत्रों के अनुसार, तीनों नेताओं को जंतर मंतर पर कथित रूप से अनधिकृत प्रवेश (ट्रेसपासिंग) के आरोप में एहतियातन हिरासत में लिया गया था। द हिंदू की 14 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, यह कार्रवाई जंतर मंतर पर चल रहे एक विरोध प्रदर्शन से जुड़ी शिकायत के आधार पर की गई। रत्ना सिंह ने दिल्ली पुलिस के बयान का हवाला देते हुए कहा कि गिरफ्तारी पुलिस द्वारा की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तीनों नेताओं को हवाई अड्डे पर हिरासत में लेने के बाद थाने ले जाया गया था। ऑपइंडिया और द इंडियन एक्सप्रेस ने 10 अक्टूबर 2026 को इस संबंध में खबर प्रकाशित की थी।

अदालत का रिहाई आदेश

मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने 11 अक्टूबर 2026 को अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका की रिहाई का आदेश पारित किया। डेवडिस्कोर्स ने इस आदेश की पुष्टि की है। अदालत के आदेश की प्रति आधिकारिक स्रोतों के माध्यम से उपलब्ध है, जिसमें न्यायिक हस्तक्षेप के बाद हिरासत समाप्त करने का निर्देश दिया गया था।

प्रदर्शन की पृष्ठभूमि

यह पूरा घटनाक्रम जंतर मंतर पर आयोजित एक एंटी-सीईसी (मुख्य चुनाव आयुक्त विरोधी) रैली से जुड़ा है। सीजेपी और अन्य नागरिक समाज संगठन चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध जता रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने कथित तौर पर अनधिकृत जमावड़े और निर्धारित क्षेत्र से बाहर जाने को आधार बनाकर कार्रवाई की।

सीजेपी की ओर से जारी बयानों में इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया गया है। संगठन का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है और एहतियातन गिरफ्तारी इसका उल्लंघन करती है।

आगे क्या?

रिहाई के बाद सीजेपी नेताओं ने आगे की कानूनी रणनीति पर चर्चा शुरू कर दी है। कानूनी जानकारों का मानना है कि एहतियातन हिरासत के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की जा सकती है। दिल्ली पुलिस की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इस मामले पर नागरिक अधिकार संगठनों और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया आनी बाकी है।

जंतर मंतर पर प्रदर्शनों को लेकर दिल्ली पुलिस की नीति पहले भी विवादों में रही है। इस ताजा घटनाक्रम से एक बार फिर सार्वजनिक स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के अधिकारों और पुलिस की एहतियातन शक्तियों के बीच संतुलन का सवाल उठ खड़ा हुआ है।

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