Vande Mataram Row: वंदे मातरम को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है। BJP ने शनिवार को कांग्रेस के केवल पहले दो अंतरे गाने के फैसले के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया। पार्टी ने कहा कि राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसकी ऐतिहासिक विरासत से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। BJP अब वंदे मातरम के इतिहास और महत्व को देशभर में पहुंचाने के लिए अभियान भी चलाएगी।
नई दिल्ली: वंदे मातरम को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच विवाद अब और गहरा गया है। BJP ने शनिवार, 22 अगस्त को नई दिल्ली में अपने नए राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक के दौरान वंदे मातरम को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया। इसमें कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के उस फैसले की कड़ी निंदा की गई, जिसमें पार्टी ने अपने कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल पहले दो अंतरे गाने की पुरानी नीति को जारी रखने का फैसला किया था।
BJP ने प्रस्ताव में वंदे मातरम के सम्मान, गरिमा, विरासत और राष्ट्रीय महत्व की रक्षा करने की बात कही है। पार्टी ने यह भी ऐलान किया कि वंदे मातरम के इतिहास, अर्थ और स्वतंत्रता संग्राम में उसके योगदान को देश के हर हिस्से तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रव्यापी जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
2 अंतरे के फैसले पर BJP ने क्या कहा?
BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की अध्यक्षता में हुई बैठक में पारित प्रस्ताव में कांग्रेस के 19 अगस्त के CWC फैसले का विरोध किया गया। कांग्रेस ने 1937 में लिए गए अपने पुराने फैसले को फिर से अपनाते हुए कहा था कि पार्टी के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे।
BJP ने इसे राष्ट्रीय गीत की ऐतिहासिक विरासत को सीमित करने वाला कदम बताया। पार्टी ने कहा कि वंदे मातरम को सांप्रदायिक दबाव, राजनीतिक तुष्टीकरण या संकीर्ण वोट-बैंक राजनीति के अधीन नहीं किया जा सकता।
BJP अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि पार्टी राष्ट्रीय गीत के सम्मान और विरासत से जुड़े किसी भी समझौते को स्वीकार नहीं करेगी।
BJP चलाएगी देशव्यापी अभियान
BJP ने सिर्फ प्रस्ताव पारित करने तक मामला सीमित नहीं रखा है। पार्टी ने वंदे मातरम की इतिहास, भावना, राष्ट्रीय महत्व और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी विरासत को लोगों तक पहुंचाने के लिए देशव्यापी अभियान चलाने का फैसला किया है।
इस अभियान में खास तौर पर युवा पीढ़ी के बीच वंदे मातरम के इतिहास और इसके सभी अंतरों की जानकारी पहुंचाने पर जोर रहेगा। BJP का कहना है कि आने वाली पीढ़ियों को स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत की भूमिका और उससे जुड़ी ऐतिहासिक स्मृतियों की जानकारी होनी चाहिए।
महात्मा गांधी के विचारों को भी जनता तक पहुंचाएगी BJP
BJP ने अपने प्रस्ताव में महात्मा गांधी के वंदे मातरम से जुड़े विचारों को भी प्रचारित करने की बात कही है। पार्टी के मुताबिक गांधी ने इसे स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े राष्ट्रवादी और साम्राज्यवाद-विरोधी भाव से जोड़ा था।
BJP का कहना है कि वंदे मातरम सिर्फ एक गीत नहीं, बल्कि भारत के स्वतंत्रता संघर्ष और राष्ट्रीय चेतना से जुड़ा ऐतिहासिक प्रतीक है।
कांग्रेस ने 19 अगस्त को क्या फैसला लिया था?
विवाद की शुरुआत कांग्रेस कार्यसमिति के 19 अगस्त के फैसले से हुई। CWC ने अपनी पुरानी 1937 की नीति को दोहराते हुए तय किया कि कांग्रेस के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो अंतरे गाए जाएंगे। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने बैठक के बाद स्पष्ट किया था कि पार्टी इस फैसले पर कायम है।
वेणुगोपाल ने इस फैसले का ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा था कि 1937 में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने इस संबंध में निर्णय लिया था। उनके अनुसार उस समय महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल समेत कई प्रमुख नेता इस बहस से जुड़े थे।
कांग्रेस का तर्क क्या है?
कांग्रेस का कहना है कि पार्टी 1937 से चली आ रही अपनी परंपरा का पालन कर रही है। पार्टी नेताओं ने यह भी कहा है कि वंदे मातरम और राष्ट्रगान भावनात्मक विषय हैं और BJP इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दे रही है।
कांग्रेस की ओर से यह तर्क भी दिया गया है कि पहले दो अंतरों में मातृभूमि की स्तुति है और इसी हिस्से को राष्ट्रीय समारोहों के लिए उपयुक्त माना गया था।
1937 में आखिर हुआ क्या था?
वंदे मातरम को लेकर मौजूदा विवाद को समझने के लिए 1937 का इतिहास महत्वपूर्ण है। कांग्रेस कार्यसमिति ने उस समय राष्ट्रीय समारोहों में वंदे मातरम के पहले दो अंतरे गाने की सिफारिश की थी।
राज्यसभा में दिसंबर 2025 में हुई चर्चा के रिकॉर्ड में भी 1937 के CWC फैसले का उल्लेख है। इसमें कहा गया था कि राष्ट्रीय समारोहों में पहले दो अंतरे गाए जाएं, जबकि आयोजकों को अन्य उपयुक्त गीत चुनने की स्वतंत्रता रहे।
कांग्रेस अब इसी ऐतिहासिक फैसले को आधार बनाकर अपने कार्यक्रमों में दो अंतरे गाने की नीति पर कायम है।
वंदे मातरम को लेकर कानून का भी मुद्दा
इस विवाद के बीच एक और महत्वपूर्ण पहलू 2026 का Prevention of Insults to National Honour Amendment है। केंद्र सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक इस संशोधन ने वंदे मातरम को राष्ट्रगान के समान कानूनी संरक्षण देने का प्रावधान किया है। कानून का उद्देश्य जानबूझकर राष्ट्रीय गीत के गायन को रोकने या उसके गायन में व्यवधान डालने जैसी गतिविधियों पर कानूनी कार्रवाई का प्रावधान करना है।
BJP इसी कानूनी बदलाव को अपने तर्क का हिस्सा बना रही है और उसका कहना है कि कांग्रेस का 1937 का राजनीतिक फैसला 2026 में संसद द्वारा बनाए गए कानून के ऊपर नहीं हो सकता।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण अंतर है—कांग्रेस का मौजूदा फैसला अपने पार्टी कार्यक्रमों में क्या गाया जाएगा इसे लेकर है, जबकि 2026 के कानून का मुख्य प्रावधान राष्ट्रीय गीत के गायन को जानबूझकर रोकने या उसमें व्यवधान डालने से संबंधित है।
BJP और कांग्रेस के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव
वंदे मातरम का विवाद अब केवल गीत के कितने अंतरे गाए जाएं, इस सवाल तक सीमित नहीं रहा है। दोनों पार्टियां इसे अलग-अलग ऐतिहासिक और राजनीतिक नजरिए से देख रही हैं।
BJP इसे राष्ट्रीय सम्मान, स्वतंत्रता संग्राम की विरासत और राष्ट्रीय चेतना से जोड़ रही है। दूसरी ओर कांग्रेस 1937 के ऐतिहासिक फैसले और उस समय के राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्णय को आधार बना रही है।
इस मुद्दे पर गृह मंत्री अमित शाह भी कांग्रेस के फैसले की आलोचना कर चुके हैं। उन्होंने इसे संसद द्वारा बनाए गए कानून के संदर्भ में चुनौती बताया और कांग्रेस पर तुष्टीकरण की राजनीति के आरोप लगाए।
BJP के प्रस्ताव में क्या-क्या प्रमुख बातें हैं?
BJP के प्रस्ताव का मुख्य फोकस वंदे मातरम की पूर्ण विरासत को बनाए रखना है। पार्टी ने:
- पूर्ण वंदे मातरम के सम्मान और राष्ट्रीय महत्व को बनाए रखने की बात कही।
- कांग्रेस के 19 अगस्त के CWC फैसले का विरोध किया।
- राष्ट्रीय गीत को राजनीतिक या सांप्रदायिक दबाव से अलग रखने की बात कही।
- वंदे मातरम के इतिहास और स्वतंत्रता आंदोलन में उसकी भूमिका पर देशव्यापी अभियान का ऐलान किया।
- युवा पीढ़ी को इसके इतिहास और महत्व से जोड़ने का लक्ष्य रखा।
- महात्मा गांधी के वंदे मातरम से जुड़े विचारों को भी प्रचारित करने का फैसला किया।
आगे और बढ़ सकता है विवाद
BJP के नए प्रस्ताव के बाद वंदे मातरम को लेकर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। BJP देशभर में अभियान के जरिए इस मुद्दे को जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस अपने 1937 के फैसले पर कायम है।
फिलहाल दोनों दलों के बीच यह विवाद राष्ट्रीय गीत, इतिहास, धर्मनिरपेक्षता, राजनीतिक विरासत और कानून जैसे कई मुद्दों को एक साथ जोड़ चुका है।
वंदे मातरम पर अब सवाल सिर्फ दो या छह अंतरे का नहीं रह गया है, बल्कि यह BJP और कांग्रेस के बीच राष्ट्रीय प्रतीकों की व्याख्या और उनके राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर एक बड़ी बहस में बदल गया है।
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