वृंदावन के श्रीराधा केलिकुंज आश्रम को लेकर उठे सवाल, लापता बच्चों की तलाश में पहुंचे कई परिवार
वृंदावन से सामने आई इस खबर ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। संत प्रेमानंद के शिष्य रसिक दुलारी शरण की आत्महत्या के बाद अब श्रीराधा केलिकुंज आश्रम को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अलग-अलग शहरों और राज्यों से कई परिवार अपने लापता बच्चों की तलाश में आश्रम पहुंच रहे हैं।
🔴 बच्चों की तलाश में आश्रम पहुंचे परिवार
शुक्रवार को हाथरस, नोएडा और दिल्ली से परिवार आश्रम पहुंचे थे। इसके बाद शनिवार को महाराष्ट्र और कासगंज से भी परिवार अपने बच्चों की तस्वीरें लेकर वृंदावन पहुंचे।
परिवारों का कहना है कि वे अपने बच्चों की तलाश में यहां पहुंचे हैं और उनसे जुड़ी जानकारी हासिल करना चाहते हैं।
📌 कौन-कौन अपने बच्चों की तलाश में पहुंचा?
- महाराष्ट्र: उज्ज्वला ताकपिरे अपने 20 वर्षीय बेटे ओम परमेश्वरी की तलाश में पहुंचीं।
- कासगंज: चंद्रपाल चौहान अपने 16 वर्षीय बेटे मयंक सिंह चौहान की तलाश में पहुंचे।
- दिल्ली: अनीता सिंह अपने 10 वर्षीय बेटे अंश की तलाश में पहुंचीं।
- वृंदावन: किशोरीलाल अपने 14 वर्षीय बेटे नवनीत की तलाश में पहुंचे।
⚠️ परिवारों ने लगाए ये आरोप
परिवारों का आरोप है कि उन्हें आश्रम के अंदर प्रवेश नहीं दिया गया। उनका कहना है कि बच्चों के बारे में भी उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिल सकी।
इसके बाद परिवार आश्रम के बाहर अपने बच्चों की तस्वीरें लेकर प्रदर्शन करने लगे।
🚨 प्रदर्शन के दौरान अभद्रता का आरोप
आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान खुद को संत प्रेमानंद का शिष्य बताने वाले कुछ लोगों ने परिवारों के साथ अभद्रता की।
मामला बढ़ने के बाद पुलिस ने दिग्विजय, सचिन और अशोक कुमार नाम के तीन लोगों को हिरासत में लिया।
हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि हिरासत में लिए गए तीनों युवक आश्रम के सीधे सदस्य नहीं हैं, बल्कि संत के समर्थक बताए जा रहे हैं।
🟢 राहत की खबर: बरसाना में मिला लापता अनुज
इसी बीच हाथरस के रहने वाले अनुज चौधरी को शनिवार को बरसाना में ढूंढ लिया गया।
पूछताछ में अनुज ने बताया कि वह घर से वाराणसी चला गया था और करीब चार दिन पहले बरसाना पहुंचा था।
अनुज के मिलने से परिवार को राहत मिली है, लेकिन दूसरे लापता बच्चों की तलाश अभी भी बड़ा सवाल बनी हुई है।
❓ अब सबसे बड़ा सवाल—आखिर बच्चे आश्रम तक कैसे पहुंचे?
एक के बाद एक परिवारों के आश्रम पहुंचने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं।
क्या ये बच्चे अपनी इच्छा से यहां पहुंचे थे?
परिवारों को उनके बारे में जानकारी क्यों नहीं मिल पा रही थी?
लापता बच्चों और आश्रम के बीच क्या कनेक्शन है?
और सबसे बड़ा सवाल—आखिर परिवारों को अपने बच्चों की तलाश के लिए आश्रम के बाहर प्रदर्शन करने की नौबत क्यों आई?
फिलहाल मामले में पुलिस की कार्रवाई और जांच जारी है। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लापता बच्चों के मामले में वास्तविक स्थिति क्या है और उनके आश्रम या वृंदावन पहुंचने के पीछे की पूरी कहानी क्या है।
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