US Immigration Rules Tightened: H-1B Visa Fee ₹90 Lakh, 2 Lakh B1/B2 Visa रद्द करने की तैयारी

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने इमिग्रेशन नियमों को और सख्त करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अमेरिकी सरकार ने नए H-1B वीजा आवेदनों पर 1,03,265 डॉलर (करीब ₹90 लाख) की अतिरिक्त फीस लगाने का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही अमेरिका में शरण (Asylum) के लिए आवेदन करने वाले ऐसे विदेशी नागरिकों के B1 (बिजनेस) और B2 (टूरिस्ट) वीजा रद्द करने की तैयारी की जा रही है, जिनके वीजा 2016 से 2026 के बीच जारी हुए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई की जद में 2 लाख तक लोग आ सकते हैं।

इन दोनों फैसलों का असर खास तौर पर उन भारतीयों पर पड़ सकता है जो अमेरिका में नौकरी, बिजनेस, पढ़ाई या यात्रा के लिए वीजा हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, H-1B की करीब ₹1 करोड़ फीस अभी प्रस्तावित नियम है, अंतिम रूप से लागू नहीं हुई है

H-1B वीजा के लिए करीब ₹90 लाख फीस का प्रस्ताव

अमेरिकी Department of Homeland Security (DHS) ने 24 अगस्त 2026 को H-1B cap-subject petitions के लिए 1,03,265 डॉलर की अतिरिक्त फीस प्रस्तावित की है। यह रकम मौजूदा सामान्य H-1B शुल्क की तुलना में कई गुना ज्यादा है। DHS के मुताबिक प्रस्तावित फीस अन्य लागू शुल्कों के अतिरिक्त होगी।

भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब ₹90 लाख के आसपास बैठती है, हालांकि वास्तविक रुपये की राशि डॉलर-रुपया विनिमय दर के अनुसार बदलती रहेगी।

प्रस्तावित नियम के तहत यह अतिरिक्त शुल्क उन H-1B petitions पर लागू होगा जो वार्षिक cap के अंतर्गत आती हैं। इनमें अमेरिका की उच्च शिक्षा संस्थान से मास्टर डिग्री या उससे अधिक योग्यता रखने वाले उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध अतिरिक्त 20,000 स्लॉट भी शामिल हैं। H-1B cap के तहत सामान्य तौर पर 65,000 और advanced-degree exemption के तहत अतिरिक्त 20,000 वीजा उपलब्ध होते हैं।

क्या अभी से देनी होगी ₹1 करोड़ की फीस?

नहीं। यह बात H-1B उम्मीदवारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।

DHS ने अभी इस शुल्क को प्रस्तावित नियम के तौर पर पेश किया है। यानी यह अपने आप तत्काल लागू नहीं हो गया है। प्रस्ताव पर नियामकीय प्रक्रिया और सार्वजनिक प्रतिक्रिया की प्रक्रिया होगी, जिसके बाद अंतिम नियम तय किया जाएगा। Reuters के मुताबिक प्रस्ताव को कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि हर H-1B आवेदक को तुरंत ₹90 लाख जमा करने होंगे।

किन H-1B आवेदकों पर पड़ेगा असर?

प्रस्तावित अतिरिक्त शुल्क मुख्य रूप से नए cap-subject H-1B petitions को प्रभावित करेगा। कुछ संस्थानों और संगठनों द्वारा दाखिल किए जाने वाले cap-exempt petitions इस अतिरिक्त शुल्क से बाहर रह सकते हैं।

DHS ने कहा है कि इस फीस से अमेरिकी सरकार को हर साल करीब 8.8 अरब डॉलर की अतिरिक्त आय हो सकती है। सरकार के अनुसार इसका इस्तेमाल इमिग्रेशन सिस्टम के प्रशासन, सुरक्षा जांच, धोखाधड़ी रोकने, वीजा प्रोसेसिंग और अन्य संबंधित सरकारी खर्चों को पूरा करने में किया जाएगा।

B1/B2 वीजा पर भी बड़ा एक्शन

H-1B फीस के प्रस्ताव के साथ ही अमेरिकी प्रशासन B1 और B2 वीजा धारकों पर भी बड़ी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

Associated Press की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका 2016 से 2026 के बीच जारी किए गए B1 और B2 वीजा रखने वाले उन विदेशी नागरिकों के वीजा रद्द करने की योजना बना रहा है जिन्होंने अमेरिका में शरण के लिए आवेदन किया है या कर रहे हैं। इस कार्रवाई से 2 लाख तक लोग प्रभावित हो सकते हैं। अगर यह कदम इसी पैमाने पर लागू होता है तो इसे अमेरिकी इतिहास में सबसे बड़े सामूहिक वीजा रद्दीकरणों में से एक माना जाएगा।

B1 वीजा आम तौर पर बिजनेस यात्रा के लिए और B2 वीजा पर्यटन तथा कुछ अन्य अस्थायी यात्राओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

वीजा रद्द होने का क्या मतलब होगा?

रिपोर्ट के मुताबिक, वीजा रद्द किए जाने का मतलब यह नहीं है कि प्रभावित हर व्यक्ति को उसी समय अमेरिका से निर्वासित कर दिया जाएगा। लेकिन इससे उनका B1/B2 गैर-आप्रवासी वीजा स्टेटस खत्म हो सकता है, जिससे अमेरिका में उनकी स्थिति और आगे रहने की क्षमता प्रभावित होगी।

अमेरिकी अधिकारियों का तर्क है कि कुछ लोगों ने अस्थायी यात्रा के लिए जारी किए गए वीजा का इस्तेमाल बाद में अमेरिका में स्थायी रूप से रहने की कोशिश के लिए किया और शरण व्यवस्था का कथित तौर पर दुरुपयोग किया।

भारतीयों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है H-1B फैसला?

H-1B वीजा अमेरिकी कंपनियों को टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, रिसर्च और अन्य specialized fields में विदेशी professionals को नियुक्त करने की अनुमति देता है। भारतीय professionals इस कार्यक्रम के सबसे बड़े लाभार्थी समूहों में रहे हैं।

करीब ₹90 लाख की प्रस्तावित अतिरिक्त फीस से कंपनियों के लिए नए विदेशी कर्मचारियों को H-1B पर नियुक्त करना बेहद महंगा हो सकता है। इससे अमेरिकी कंपनियां विदेशी कर्मचारियों की hiring strategy बदल सकती हैं और कुछ मामलों में स्थानीय कर्मचारियों को प्राथमिकता देने या offshore hiring बढ़ाने पर विचार कर सकती हैं।

Reuters के अनुसार, अमेरिकी H-1B applications की संख्या भी हाल के वर्षों में काफी घटी है—2023 में करीब 7.94 लाख से घटकर 2025 में लगभग 3.44 लाख रह गई।

पहले भी H-1B पर लग चुकी है $100,000 फीस

यह प्रस्ताव अचानक सामने नहीं आया है। ट्रंप प्रशासन ने इससे पहले भी H-1B पर 1 लाख डॉलर की फीस लगाने का प्रयास किया था। उस व्यवस्था को लेकर अदालत में चुनौती दी गई और जून 2026 में एक संघीय जज ने इसे गैरकानूनी ठहराया था।

अब प्रशासन ने एक अलग कानूनी और नियामकीय प्रक्रिया के जरिए $103,265 की फीस प्रस्तावित की है। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन H-1B कार्यक्रम को महंगा बनाने और विदेशी skilled workers की संख्या तथा चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश जारी रखना चाहता है।

अमेरिका में इमिग्रेशन पर बढ़ रही सख्ती

H-1B फीस और B1/B2 वीजा रद्द करने की तैयारी ट्रंप प्रशासन की व्यापक immigration crackdown का हिस्सा है। अमेरिकी प्रशासन पिछले महीनों में वीजा जांच, asylum claims और विदेशी नागरिकों की screening को लेकर कई सख्त कदम उठा चुका है।

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के दौरान अब तक 1.75 लाख से अधिक वीजा रद्द किए जा चुके हैं, जिनमें अलग-अलग श्रेणियों के विदेशी नागरिक शामिल हैं।

भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स पर क्या असर?

नई नीतियों का सबसे बड़ा असर उन भारतीयों पर पड़ सकता है जो अमेरिका को नौकरी, उच्च शिक्षा या बिजनेस के लिए एक प्रमुख destination मानते हैं।

खासकर H-1B के मामले में यदि प्रस्तावित $103,265 फीस अंतिम नियम के रूप में लागू होती है, तो अमेरिकी employer के लिए किसी नए विदेशी skilled worker को sponsor करने की लागत बहुत बढ़ जाएगी। इससे भारतीय IT professionals, engineers और अन्य highly skilled workers के लिए अमेरिकी नौकरी बाजार में प्रतिस्पर्धा और कठिन हो सकती है।

हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि प्रस्तावित H-1B फीस अभी अंतिम नियम नहीं है और इसमें बदलाव, कानूनी चुनौती या अन्य नियामकीय परिवर्तन संभव हैं।

क्या भारत से अमेरिका जाने वालों को घबराने की जरूरत है?

फिलहाल सामान्य भारतीय पर्यटकों या मौजूदा H-1B holders के लिए यह खबर सीधे तौर पर यह नहीं कहती कि सभी वीजा रद्द किए जा रहे हैं।

H-1B के मामले में प्रस्तावित करीब ₹90 लाख की फीस मुख्य रूप से नए cap-subject petitions से संबंधित है। वहीं B1/B2 कार्रवाई खास तौर पर उन विदेशी नागरिकों को लक्षित करती है जिन्होंने अमेरिका में asylum के लिए आवेदन किया है या कर रहे हैं।

इसलिए यात्रियों, छात्रों और professionals को अपनी visa category और व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार नियमों को देखना चाहिए। किसी भी प्रस्ताव को अंतिम कानून मानकर निर्णय लेना फिलहाल जल्दबाजी होगी।

अमेरिका ने immigration policy को और सख्त करने की दिशा में दो बड़े संकेत दिए हैं—नए H-1B petitions पर $103,265 यानी करीब ₹90 लाख की अतिरिक्त फीस का प्रस्ताव और asylum applicants के B1/B2 visas को बड़े पैमाने पर रद्द करने की योजना

अगर H-1B प्रस्ताव लागू होता है तो अमेरिकी कंपनियों के लिए विदेशी skilled workers को hire करना पहले की तुलना में काफी महंगा हो जाएगा। वहीं B1/B2 visa revocation का प्रस्ताव अमेरिकी visitor visa system में asylum के इस्तेमाल को लेकर प्रशासन की सख्त नीति को दिखाता है।

सबसे अहम बात: H-1B की ₹90 लाख के करीब फीस अभी प्रस्तावित है, अंतिम रूप से लागू नियम नहीं। आने वाले दिनों में सार्वजनिक प्रतिक्रिया, अंतिम नियम और संभावित कानूनी कार्रवाई इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी।

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Arpit Mishra
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