UPI भुगतान के नियमों में बड़ा बदलाव
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने डिजिटल भुगतान के ढांचे में एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू किया है। अब 2,000 रुपये से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर 5 रुपये का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) वसूला जाएगा। 16 सितंबर 2026 से प्रभावी हुए इस नए नियम का असर ईंधन भुगतान, OTT सब्सक्रिप्शन और ब्रोकरेज सेवाओं जैसी विभिन्न श्रेणियों पर पड़ेगा।
वर्ष 2016 में लॉन्च होने के बाद से UPI ने भारत में डिजिटल भुगतान को पूरी तरह से बदल दिया था। अब तक यह प्रणाली उपभोक्ताओं और व्यापारियों के लिए काफी हद तक मुफ्त रही है, जिसने इसे देश भर में तेजी से अपनाने में मदद की। हालांकि, अब यह बदलाव डिजिटल भुगतान के 'जीरो-फी' मॉडल से हटकर एक नई दिशा की ओर संकेत करता है।
यह नया शुल्क संरचना उन सभी मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लागू होती है जो 2,000 रुपये की सीमा को पार करते हैं। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं:
- ईंधन भुगतान: पेट्रोल पंपों पर होने वाले बड़े भुगतान अब इस दायरे में आएंगे।
- OTT सब्सक्रिप्शन: मनोरंजन प्लेटफॉर्म्स के लिए किए जाने वाले भुगतान पर भी यह शुल्क प्रभावी होगा।
- ब्रोकरेज सेवाएं: शेयर बाजार और निवेश प्लेटफॉर्म्स पर होने वाले ट्रांजैक्शन भी इस नियम के अंतर्गत आते हैं।
इस बदलाव को लेकर उद्योग जगत में चर्चाएं तेज हो गई हैं। ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म 'जेरोधा' के संस्थापक नितिन कामथ ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा है कि MDR का प्रावधान उचित है, लेकिन उन्होंने ब्रोकरेज फर्मों के लिए एक निचली सीमा (lower cap) तय करने की वकालत की है। उनका मानना है कि उच्च-आवृत्ति वाले ट्रांजैक्शन के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है ताकि खुदरा निवेशकों पर बोझ न बढ़े।
यह बदलाव क्यों महत्वपूर्ण है?
हालांकि प्रति ट्रांजैक्शन 5 रुपये का शुल्क सुनने में मामूली लग सकता है, लेकिन यह उन उपयोगकर्ताओं के लिए वित्तीय प्रभाव डाल सकता है जो नियमित रूप से उच्च मूल्य के डिजिटल भुगतान करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम न केवल मर्चेंट ट्रांजैक्शन की लागत को प्रभावित करेगा, बल्कि फिनटेक कंपनियों और ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म्स को अपने मूल्य निर्धारण मॉडल (pricing models) पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर करेगा।
नियामक दृष्टिकोण से, यह निर्णय पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम एक्ट, 2007 के तहत लिया गया है। भविष्य में, उद्योग जगत के हितधारक RBI के साथ मिलकर इस MDR कैप को और अधिक तर्कसंगत बनाने के लिए बातचीत कर सकते हैं, विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए जहां ट्रांजैक्शन की संख्या बहुत अधिक है।
आगे की राह
आने वाले समय में, NPCI इस शुल्क को लागू करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सकता है। उपभोक्ताओं को अब उन सेवाओं के लिए मामूली मूल्य समायोजन देखने को मिल सकता है जिन्होंने अब तक ट्रांजैक्शन लागत को स्वयं वहन किया था। बाजार में इस बदलाव के बाद होने वाले ट्रांजैक्शन वॉल्यूम और उपभोक्ता प्रतिक्रिया पर बारीकी से नजर रखी जाएगी, जो भविष्य में किसी भी नीतिगत संशोधन का आधार बनेगी।