मुंबई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंबई दौरे से पहले बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में सामने आए कथित फर्जी PMO पहचान पत्र के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जियो वर्ल्ड प्लाजा से गिरफ्तार रोहन पारेख अब पुलिस जांच के केंद्र में हैं, लेकिन अदालत में उनके पक्ष ने दावा किया है कि पारेख खुद एक बड़े धोखे का शिकार हो सकते हैं।
पुलिस ने रोहन पारेख और उनके साथ मौजूद दिलीप कुंडे को गिरफ्तार किया है। दोनों को 11 सितंबर तक पुलिस हिरासत में भेजा गया है। मामले में एक तीसरे व्यक्ति प्रथमेश बागुल की भी तलाश की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, घटना 7 सितंबर की शाम की है, जब रोहन पारेख जियो वर्ल्ड प्लाजा पहुंचे थे। उनके साथ दिलीप कुंडे भी मौजूद थे, जिन्हें उनका निजी बॉडीगार्ड बताया गया।
सुरक्षा जांच के दौरान कुंडे के पास मौजूद हथियार के कारण मेटल डिटेक्टर अलर्ट हुआ। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने मामले की गहराई से जांच शुरू की। इसी दौरान रोहन पारेख की ओर से एक कथित PMO पहचान पत्र दिखाया गया, जिसने पूरे मामले को संदिग्ध बना दिया।
जांच में सामने आया कि कथित पहचान पत्र में कुछ ऐसी कमियां थीं, जिनके बाद उसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठे। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह ID कहां से आई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
लाइसेंसी हथियार भी बना जांच का अहम हिस्सा
दिलीप कुंडे के पास से एक .32 बोर का हथियार और कारतूस मिलने की बात सामने आई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार हथियार लाइसेंसी बताया गया है, लेकिन सुरक्षा वाले क्षेत्र में हथियार के साथ पहुंचने और कथित PMO पहचान पत्र के इस्तेमाल के आरोप ने जांच को गंभीर बना दिया है।
अदालत में रोहन का अलग पक्ष
मामले में सबसे बड़ा ट्विस्ट अदालत में रोहन पारेख की ओर से रखा गया पक्ष है। उनके वकील का कहना है कि रोहन ने जानबूझकर खुद को फर्जी PMO अधिकारी के रूप में पेश नहीं किया, बल्कि संभव है कि उन्हें किसी संगठित धोखाधड़ी के जरिए भ्रमित किया गया हो।
वकील के मुताबिक, रोहन को वर्ष 2024 में PMO से जुड़े काम का प्रस्ताव मिलने का दावा किया गया था। उनके पास कथित तौर पर ईमेल, ऑफर से जुड़े दस्तावेज और प्रधानमंत्री कार्यालय से संबंधित सामग्री पहुंचाई गई थी। बचाव पक्ष का कहना है कि ये सभी दस्तावेज जांच एजेंसियों को सौंप दिए गए हैं और अब इन्हीं की असलियत इस मामले की दिशा तय कर सकती है।
बॉडीगार्ड रखने के पीछे भी अलग दावा
रोहन के वकील ने यह भी दावा किया कि उन्हें निजी सुरक्षा रखने के निर्देश मिले थे। बचाव पक्ष के अनुसार, कथित PMO पहचान पत्र रोहन को केवल डिजिटल रूप या स्क्रीनशॉट के तौर पर भेजा गया था और उन्हें इसकी कोई आधिकारिक भौतिक कॉपी नहीं दी गई थी।
यह दावा सही साबित होता है या नहीं, यह पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
क्या PM मोदी के कार्यक्रम से जुड़ा था मामला?
घटना ऐसे समय सामने आई जब BKC में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी थी। हालांकि, मुंबई पुलिस ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार लोगों और प्रधानमंत्री के निर्धारित कार्यक्रम के बीच किसी संबंध की पुष्टि नहीं हुई है।
पीएम मोदी ने बाद में BKC स्थित जियो वर्ल्ड सेंटर में Global Fintech Fest 2026 का उद्घाटन किया। पुलिस का कहना है कि जियो वर्ल्ड प्लाजा में हुई यह घटना प्रधानमंत्री के दौरे से संबंधित नहीं थी।
जांच का सबसे बड़ा सवाल—फर्जी ID किसने बनाई?
अब जांच का फोकस सिर्फ रोहन पारेख पर नहीं है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित फर्जी पहचान पत्र तैयार करने वाला व्यक्ति कौन है, क्या इस तरह के दस्तावेज पहले भी इस्तेमाल किए गए और मामले में फरार बताए जा रहे तीसरे आरोपी की भूमिका क्या है।
रोहन पारेख के वकील जहां उन्हें ठगी का शिकार बता रहे हैं, वहीं पुलिस कथित फर्जी PMO पहचान पत्र के स्रोत और पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में केवल एक संदिग्ध ID के इस्तेमाल तक सीमित न रहकर संभावित फर्जीवाड़े के बड़े नेटवर्क की जांच में बदल सकता है। फिलहाल, मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।